अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह

भारत में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की स्थान 

निर्देशांक (पोर्ट ब्लेयर): 11.68°N 92.77°Eनिर्देशांक: 11.68°N 92.77°E 

देश - भारत 

गठन 1 नवम्बर 1956 

राजधानी और सबसे बड़ा शहर - पोर्ट ब्लेयर 

जिले - 3 

शासन 

 • उपराज्यपाल एडमिरल (रेटेड) देवेंद्र कुमार जोशी 

 • मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण, IAS 

 • MP (लोक सभा) कुलदीप राय शर्मा 

 • उच्च न्यायालय कलकत्ता उच्च न्यायालय (पोर्ट ब्लेयर बेंच) 

क्षेत्रफल 

 • कुल 8249 किमी2 (3,185 वर्गमील) 

क्षेत्र दर्जा 28वां 

जनसंख्या (2012) 

 • कुल 380,520 

 • घनत्व 46 किमी2 (120 वर्गमील) 

भाषाएं 

 • राजभाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी

 • बोली जाने वाली करेन, बंगाली, तमिल, तेलुगू, हिन्दी, निकोबारी, मलयालम, सादरी, कुड़ुख, मुण्डा, खड़िया

समय मण्डल IST (यूटीसी+05:30) 

आई॰एस॰ओ॰ ३१६६ कोड IN-AN 

HDI (2019) वृद्धि0.741 (high) • 6वां 

वेबसाइट www.andaman.gov.in 

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत का एक केन्द्र शासित प्रदेश है। ये बंगाल की खाड़ी के दक्षिण में हिन्द महासागर में स्थित है। अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह लगभग 572 छोटे बड़े द्वीपों से मिलकर बना है जिनमें से सिर्फ कुछ ही द्वीपों पर लोग रहते हैं। इसकी राजधानी पोर्ट ब्लेयर है।

भारत का यह केन्द्र शासित प्रदेश हिंद महासागर में स्थित है और भौगोलिक दृष्टि से दक्षिण पूर्व एशिया का हिस्सा है। यह इंडोनेशिया के आचेह के उत्तर में 150 किमी पर स्थित है तथा अंडमान सागर इसे थाईलैंड और म्यांमार से अलग करता है। दो प्रमुख द्वीपसमूहों से मिलकर बने इस द्वीपसमूह को 10° उ अक्षांश पृथक करती है, जिसके उत्तर में अंडमान द्वीप समूह और दक्षिण में निकोबार द्वीप समूह स्थित हैं। इस द्वीपसमूह के पूर्व में हिन्द महासागर और पश्चिम में बंगाल की खाड़ी स्थित है।

द्वीपसमूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर एक अंडमानी शहर है। 2011 की भारत की जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसंख्या 379,944 है। जिसमें 202,330 (53.25%) पुरुष तथा 177,614 (46.75%) महिला है। लिेगानुपात प्रति 1,000 पुरूषोंं में में 878 महिला है। केवल 10% आबादी हीं निकोबार द्वीप में रहती है। पूरे क्षेत्र का कुल भूमि क्षेत्र लगभग 8249 किमी² या 2508 वर्ग मील है।

इतिहास

इस द्वीप पर अंग्रेजों का आधिपत्य था और बाद में दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापान द्वारा इस पर अधिकार कर लिया गया। कुछ समय के लिए यह द्वीप नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फौज के अधीन भी रहा था। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि देश में कहीं भी पहली बार पोर्ट ब्लेयर में ही तिरंगा फहराया गया था। यहां नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने 30 दिसम्बर 1943 को यूनियन जैक उतार कर तिरंगा झंडा फहराया था। इसलिय अंडमान निकोबार प्रशासन की तरफ से 30 दिसम्बर को हर साल एक भव्य कार्यक्रम मनाने की शुरुआत की गई है। जनरल लोकनाथन भी यहाँ के गवर्नर रहे थे। 1947 में ब्रिटिश सरकार से मुक्ति के बाद यह भारत का केन्द्र शासित प्रदेश बना।

ब्रिटिश शासन द्वारा इस स्थान का उपयोग स्वाधीनता आंदोलन में दमनकारी नीतियों के तहत क्रांतिकारियों को भारत से अलग रखने के लिये किया जाता था। इसी कारण यह स्थान आंदोलनकारियों के बीच काला पानी के नाम से कुख्यात था। कैद के लिये पोर्ट ब्लेयर में एक अलग कारागार, सेल्यूलर जेल का निर्माण किया गया था जो ब्रिटिश इंडिया के लिये साइबेरिया की समान था।

17वीं सदी में इस द्वीप समूह पर मराठों ने शासन किया गया था। मराठों के बाद इस पर ब्रिटिश शासकों ने राज्य किया। 18वीं शताब्दी की शुरुआत में मराठा एडमिरल कान्होजी आंग्रे द्वारा यहाँ पर अधिकार किया गया था। सन् 1869 में अंग्रेजों ने निकोबार द्वीपों पर कब्जा कर लिया और उन्हें सन् 1872 में एक प्रशासनिक इकाई बनाने के लिए अंडमान द्वीपों से जोड़ दिया गया। जापानी सेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान साल 1942 में द्वीपों पर कब्जा कर लिया जो सन् 1945 में विश्व युद्ध के अंत तक कायम रहा। सन् 1947 में ब्रिटिश शासन से देश आज़ादी के बाद यह द्वीप समूह भारत का केन्द्र शासित प्रदेश बना और उसका नियंत्रण भारत को सौंप दिया गया। यहां आने वाला पहला पश्चिमी व्यक्ति मार्को पोलो था जिसने इस जगह को ‘लैंड आॅफ हैड हंटर’ कहा था।

ये द्वीप बंगाल की खाड़ी का हिस्सा हैं, जो भौगोलिक दृष्टि से 11 डिग्री 41’ उत्तर और 92 डिग्री 46’ पूर्व में स्थित है। टापू, द्वीपों और चट्टानों के फैलाव वाला यह इलाका कुल 8249 वर्ग किलोमीटर का है। इस द्वीप समूह में मूंगा भित्ति, सुन्दर सागर तट, खंडहर और विभिन्न प्रकार को दुर्लभ वनस्पतियां देखने को मिलती हैं। यहाँ पर लगभग 572 द्वीप हैं। इस द्वीप समूह का लगभग 86% भाग वन संपदा से घिरा हुआ हैं। अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह का राजकीय पक्षी 'लकड़ी कबूतर' है। अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह का राजकीय पेड 'डमान पड़ौक' है। अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह का राजकीय पशु 'दुगोंग' हैं। हुगली, कलपोंग यहाँ की प्रमुख नदियाँ है।

इन द्वीपसमूहों का मौसम नम, उष्‍ण कटिबंधीय तटीय मौसम है। यहाँ का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। इन द्वीपों में दक्षिणी पश्चिमी और उत्तरी पूर्वी मानसून से वर्षा होती है। यहाँ मई माह से दिसंबर माह के बीच अधिकतम वर्षा होती है। यहाँ पर सालाना औसत वर्षा 3180.0 मिमी तक होती है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सरकार और राजनीति भारत के राज्यों और कई केंद्र शासित प्रदेशों से भिन्न है। लेफ्टिनेंट गवर्नर खुद अंडमान और निकोबार की सरकार में कार्यकारी प्रमुख होता है। उनकी देखरेख में ही विभिन्न विभागों के प्रमुखों द्वारा प्रत्यक्ष निगरानी के तहत कार्यकारी शाखा चलती है। राज्य की न्यायपालिका कोलकाता हाईकोर्ट के अंतर्गत आती है। राज्य के सरकारी विभाग निदेशालय और सचिवालय दोनों स्तरों पर कार्य करते हैं।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के वर्तमान उपराज्यपाल देवेंद्र कुमार जोशी है। उन्होंने अक्टूबर 2017 को अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की है।

एडमिरल डी के जोशी, पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एनएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) नौसेना स्टाफ के 21वें प्रमुख थे, जिन्होंने 31 अगस्त 2012 को पदभार ग्रहण किया था। 04 जुलाई 1954 को अल्मोडा (उत्तराखंड) में जन्मे, वह एक विशेषज्ञ हैं पनडुब्बी रोधी युद्ध. वह नेवल वॉर कॉलेज (यूएसए), कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर (मुंबई) और नेशनल डिफेंस कॉलेज (नई दिल्ली) के पूर्व छात्र हैं। वह डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (वेलिंगटन) में वरिष्ठ प्रशिक्षक (NAVY) भी रहे हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की अर्थव्यवस्था में कृषि, व्यापार, वाणिज्य, मत्स्य पालन और उद्योग शामिल हैं।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह प्रदेश की मुख्य फसल चावल है। अंडमान की मुख्य नगदी फसल धान है जबकि नारियल और सुपारी निकोबार की मुख्य नगदी फसलें हैं। यहाँ पर विभिन्न प्रकार के फल जैसे आम, सेपोटा, संतरा, केला, पपीता, अनान्‍नास और कंदमूल आदि की भी खेती भी की जाती हैं। यहां की अन्य फसलों में दालें, तिलहन और सब्जियां और मसाले जैसे मिर्च, लौंग, जायफल और दालचीनी की भी पैदावार की जाती हैं। इन द्वीपों पर रबर, लाल तेल, पाम और काजू भी सीमित पैमाने में उगाए जाते हैं। शानदार वर्षा वन अंडमान को लकड़ी की ‘सोने की खान’ बनाता है।

26 दिसंबर 2004 को सुनामी लहरों के कहर से इस द्वीप पर 6000 से ज्यादा लोग मारे गये।

जिले

ण्डमान व निकोबार द्वीपसमूह में तीन जिले हैं:-

उत्तर और मध्य अण्डमान जिला

दक्षिण अण्डमान जिला

निकोबार जिला

सेलुलर जेल-

अंग्रेजी सरकार द्वारा भारत के स्वतंत्रता सैनानियों पर किए गए अत्याचारों की मूक गवाह इस जेल की नींव 1897 में रखी गई थी। इस जेल के अंदर 694 कोठरियां हैं। इन कोठरियों को बनाने का उद्देश्य बंदियों के आपसी मेल जोल को रोकना था। आक्टोपस की तरह सात शाखाओं में फैली इस विशाल कारागार के अब केवल तीन अंश बचे हैं। कारागार की दीवारों पर वीर शहीदों के नाम लिखे हैं। यहां एक संग्रहालय भी है जहां उन अस्त्रों को देखा जा सकता है जिनसे स्वतंत्रता सैनानियों पर अत्याचार किए जाते थे।

कार्बिन-कोव्स समुद्रतट

हरे-भरे वृक्षों से घिरा यह समुद्रतट एक मनोरम स्थान है। यहां समुद्र में डुबकी लगाकर पानी के नीचे की दुनिया का अवलोकन किया जा सकता है। यहां से सूर्यास्त का अद्भुत नजारा काफी आकर्षक प्रतीत होता है। यह बीच अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए लोकप्रिय है।

 

रॉस द्वीप-(वर्तमान नाम- नेताजी सुभाषचन्द्र बोस द्वीप)

यह द्वीप ब्रिटिश वास्तुशिल्प के खंडहरों के लिए प्रसिद्ध है। रॉस द्वीप 200 एकड़ में फैला हुआ है। फीनिक्स उपसागर से नाव के माध्यम से चंद मिनटों में रॉस द्वीप पहुंचा जा सकता है। सुबह के समय यह द्वीप पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है।

पिपोघाट फार्म

80 एकड में फैला पिपोघाट फार्म दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधों और जीव- जन्तुओं के लिए जाना जाता है। यहां एशिया का सबसे प्राचीन लकड़ी चिराई की मशीन छातास सा मिल है।

बेरन द्वीप-

यहां भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। यह द्वीप लगभग 3 किलोमीटर में फैला है। यहां का ज्वालामुखी 28 मई 2005 में फटा था। तब से अब तक इससे लावा निकल रहा है। It is located in North Andaman.

डिगलीपुर

उत्तरी अंडमान द्वीप में स्थित प्रकृति प्रेमियों को बहुत पसंद आता है। यह स्थान अपने संतरों, चावलों और समुद्री जीवन के लिए प्रसिद्ध है। यहां की सेडल पीक आसपास के द्वीपों से सबसे ऊंचा प्वाइंट है जो 732 मीटर ऊंचा है। अंडमान की एकमात्र नदी कलपोंग यहां से बहती है।

वाइपर द्वीप

यहां किसी जमाने में गुलाम भारत से लाए गए बंदियों को पोर्ट ब्लेयर के पास वाइपर द्वीप पर उतारा जाता था। अब यह द्वीप एक पिकनिक स्थल के रूप में विकसित हो चुका है। यहां के टूटे-फूटे फांसी के फंदे निर्मम अतीत के साक्षी बनकर खड़े हैं। यहीं पर शेर अली को भी फांसी दी गई थी, जिसने १८७२ में भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड मेयो की हत्या की थी।

सिंक व रेडस्किन द्वीप-

यहां के स्वच्छ निर्मल पानी का सौंदर्य सैलानियों का मन मोह लेता है। इन द्वीपों में कई बार तैरती हुई डाल्फिन मछलियों के झुंड देखे जा सकते हैं। शीशे की तरह साफ पानी के नीचे जलीय पौधे व रंगीन मछलियों को तैरते देखकर पर्यटक अपनी बाहरी दुनिया को अक्सर भूल जाते हैं।

शिक्षा व्यवस्था

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में शिक्षा पांच माध्यमों अर्थात अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु और बंगाली में प्रदान की जाती है। सभी सीनियर सेकेंडरी और सेकेंडरी स्कूल सीबीएसई से संबद्ध हैं। छात्राओं का प्रतिशत 48.38 और महिला शिक्षकों का प्रतिशत 56.62% है।

प्राकृतिक संसाधन, खनिज पदार्थ व उद्योग

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और आसपास के समुद्रों के प्राकृतिक संसाधनों पर चर्चा की गई है। अंडमान द्वीप समूह पर पाए जाने वाले चट्टानों और खनिजों में मैग्नेटाइट, पाइराइट-चलकोपीराइट, क्रोमाइट, सोना, निकल, सल्फर, कोयला और चूना पत्थर शामिल हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में उनकी सांद्रता उप-आर्थिक है।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के प्रमुख उद्योगों में पीवीसी पाइप और फिटिंग, पेंट और वार्निश, फायबर ग्लास, साफ्ट ड्रिंक और पेय पदार्थ और स्टील फर्नीचर शामिल हैं। इस क्षेत्र में खनिज तत्वों में चुना पत्थर, मूंगा (कोरल) आदि पाए जाते है। अंडमान द्वीप समूह पर व्यवसायिक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा है

वेशभूषा एवं पहनावा

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ऐसी कोई विशिष्ट पोशाक नहीं है। आज तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बहुत से लोग ऐसे हैं जो कोई पोशाक नहीं पहनते हैं। यह मुख्य रूप से सभ्य दुनिया से उनके अलगाव के कारण है। प्रहरी लोग अभी भी द्वीपों में नग्न घूमते हैं।

संस्कृति और कला

यहाँ के लोग मैत्रीपूर्ण और खुशनुमा होते हैं और पैसे स्वीकार नहीं करते और वस्तु-विनिमय को पसंद करते हैं। यहाँ पर हिंदू धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम धर्म के लोगो की मात्रा अत्यधिक है।

बोली जाने वाली भाषाएँ

यहाँ पर अन्दमानी, महाअन्दमानी, सेन्टीनीली और ओंगान भाषाएँ आदिवासियों द्वारा बोली जाती है। भारत के अन्य राज्यों में बोली जाने वाली भाषाएं जैसे बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मलयालम, निकोबारी और तेलुगू भी यहां व्यापक रूप से बोली जाती हैं।

मुख्य भोजन

अंडमान के मुख्य आहार में चावल, नारियल, मसाले और बहुत सारे समुद्री भोजन शामिल हैं। वास्तव में द्वीपों का समूह होने के कारण अंडमान समुद्री भोजन प्रेमियों के लिए स्वर्ग है। कटलफिश, केकड़े, झींगा मछली, झींगे से लेकर सर्वकालिक पसंदीदा रेड स्नैपर तक, आप इन द्वीपों पर विभिन्न प्रकार के समुद्री भोजन का स्वाद ले सकते हैं।

मनाए जाने वाले प्रमुख त्यौहार

अण्डमान और निकोबार में सभी धर्मों के लोग अपने-2 त्योहार मानाते हैं। विशेष समूहों के विशेष त्योहारो में बंगाली लोग दुर्गापूजा, तमिलों के लिए पंगुनी उथिरम, तेलगु के लिए पोंगल और मलयालियों के लिए ओणम शामिल हैं। यहाँ के कुछ खास त्यौहारों में शिवरात्रि, जन्माष्टमी, होली, दीपावली, रामनवमीं, ईद, क्रिसमस, गुड फ्राइडे आदि बड़ी श्रद्धा के साथ मनाए जाते हैं।

आदिवासी/जनजाति समूह

अंडमानी अंडमान द्वीप समूह के विभिन्न स्वदेशी लोग हैं, जो भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा हैं, जो दक्षिणपूर्व एशिया में बंगाल की खाड़ी के दक्षिणपूर्वी हिस्से में है।

निकोबारी ग्रेट अंडमानी नृत्य अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के मुख्य लोक नृत्य हैं।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह की राजकीय भाषा हिंदी, अंग्रेजी है।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह का राजकीय पशु डूगोंग और राजकीय पक्षी अंडमान जंगली कबूतर है।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह का राजकीय फूल अंडमान जरुल और राजकीय पेड़ अण्डमान रेडवूड है।

अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह का सबसे बड़ा शहर पोर्ट ब्लेयर है।

आवागमन

वायु मार्ग-

देश की सभी प्रमुख एयरलाइन्स की नियमित उड़ानें पोर्ट ब्लेयर से चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली, बंगलूरू , मुम्बई और भुवनेश्वर को जोडती हैं। दिन भर में कुल 18 उडानें हैं। उपराज्यपाल प्रो.जगदीश मुखी के प्रयासों से हवाई किराया भी काफी कम हो गया है।

जल मार्ग-

कोलकाता, चेन्नई और विशाखापट्टनम से जलयान पोर्ट ब्लेयर जाते हैं। जाने में दो-तीन दिन का समय लगता है। पोर्ट ब्लेयर से जहाज छूटने का कोई निश्चित समय नहीं है।

Share