महाराणा क्षेत्र सिंह

महाराणा क्षेत्र सिंह 

राणा - 1364-1382  

मेवाड़ के राणा 

शासनावधि - 1364-1382 (18 साल) 

पूर्ववर्ती राणा हम्मीर सिंह  

उत्तरवर्ती राणा लाखा  

निधन 1382  

पिता राणा हम्मीर सिंह  

खेता या क्षेत्र सिंह  (निधन 1382) मेवाड़ साम्राज्य के शासक थे। इनके पिता का नाम राणा हम्मीर सिंह था जबकि इनके उत्तराधिकार राणा लखा हुए इन्होंने अजमेर और मांडलगढ़ में शासन किया था।

राणा क्षेत्र सिंह जिन्होंने 1364 ईस्वी से 1382 ईस्वी तक मेवाड़ राज्य शासन किया था क्षेत्र सिंह राणा हम्मीर सिंह की सन्तान थे। इन्होंने अजमेर और मांडलगढ़ पर शासन किया था जबकि मंदसौर और छप्पन पर भी राज काज किया था। उनका निधन एक युद्ध के दौरान 1382 में हो गया था इसके बाद इनके उत्तराधिकारी इनके ही पुत्र राणा लाखा हुए थे।

महाराणा हमीर सिंह के देहांत के पश्चात उनके पुत्र महाराणा क्षेत्र सिंह ने सत्ता भार संभाला। महाराणा हमीर सिंह ने बहुत अधिक सीमा तक मेवाड़ को एक सुव्यवस्थित राज्य में परिवर्तित करने में सफलता प्राप्त की थी। इस प्रकार महाराणा क्षेत्र सिंह को एक सुव्यवस्थित विरासत उत्तराधिकार में प्राप्त हुई। महाराणा क्षेत्र सिंह को इतिहास में राणा खेता सिंह के नाम से भी जाना जाता है। महाराणा क्षेत्र सिंह ने मेवाड़ पर 1364 ई0 से 1382 ई0 तक अर्थात कुल मिलाकर 18 वर्ष तक शासन किया। अपने पिता के पदचिह्नों का अनुकरण करते हुए महाराणा क्षेत्र सिंह ने अपने राज्य विस्तार की ओर भी ध्यान दिया। अपने इसी विचार से प्रेरित होकर महाराणा ने राजा बनते ही अजमेर पर आक्रमण कर उसे अपने अधीन कर लिया। इस प्रकार अजयमेरु नाम की यह रियासत उस समय मेवाड़ का एक हिस्सा बन गई। इस जीत से महाराणा क्षेत्र सिंह को विशेष ख्याति प्राप्त हुई।

इतिहास में राणा क्षेत्र सिंह की अजमेर विजय को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। अपने विजय अभियान को जारी रखते हुए महाराणा क्षेत्र सिंह ने मेवाड़ के विस्तार को बढ़ाकर बिजोलिया और भीलवाड़ा को भी अपने अधीन कर लिया। इससे राणा की शक्ति में और भी अधिक वृद्धि हो गई।

 

महाराणा क्षेत्र सिंह ने मालवा का क्षेत्र जीत कर भी अपने अधीन कर लिया था। महाराणा क्षेत्र सिंह का समकालीन मुस्लिम शासक दिलावर खान उस समय मालवा का शासक था। महाराणा ने मालवा को अपने अधीन करने के लिए उस पर आक्रमण कर दिया। महाराणा क्षेत्र सिंह के रण कौशल और युद्ध कौशल के सामने दिलावर खान अधिक देर तक रुक नहीं पाया और उसे मैदान छोड़कर भागना पड़ा। यद्यपि मेवाड़ और मालवा की शत्रुता के भाव का भी श्रीगणेश यहां से हो गया था जो आगे भी हमें दिखाई देता रहा। दिलावर खान को महाराणा क्षेत्र सिंह के सामने विजय तो मिली ही नहीं पर इस युद्ध में उसे मृत्यु अवश्य प्राप्त हो गई। महाराणा क्षेत्र सिंह की खातीन नाम की एक दासी थी। उस दासी से दो पुत्र हुए थे । जिनमें से एक का नाम चाचा और दूसरे का मेरा था। उनकी अपनी रानी से पैदा हुए राणा के पुत्र का नाम लाखा था।

सन 1382 में हाडोती के हाडा शासकों को पराजित करने के पश्चात बूंदी के शासक लाल सिंह के साथ महाराणा का एक भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध इतना भयंकर था कि यह समझ नहीं आ रहा था कि युद्ध में जय पराजय किसकी होगी ? दोनों पक्ष के योद्धा एक दूसरे पर भूखे शेर की भांति टूट पड़े थे। बड़े दुर्भाग्य की बात थी कि दोनों ही शासक अपनी ही शक्ति का नाश कर रहे थे आप अपने ही सजातीय भाइयों का संहार कर रहे थे। इस युद्ध का बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम यह निकला कि इसने बूंदी के शासक लाल सिंह और मेवाड़ के शासक महाराणा क्षेत्र सिंह दोनों के ही प्राण ले लिए। महाराणा क्षेत्र सिंह युद्ध के मैदान में लड़ते लड़ते बलिदान हो गए। उनके बलिदान के साथ मेवाड़ के सूर्यास्त हो गया। महाराणा क्षेत्र सिंह का अवसान उस समय भारत के लिए बहुत ही अधिक दुख का विषय था। यह 1382 ई0 की घटना है।

क्षेत्र सिंह के पश्चात उनके पुत्र महाराणा क्षेत्र सिंह के पश्चात उनके पुत्र लाखन सिंह ने मेवाड़ पर शासन किया। 

 

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