
भारत के गृहमंत्री
पद बहाल - 2 सितम्बर 1982 – 19 जुलाई 1984
पूर्वा धिकारी रामस्वामी वेंकटरमण
उत्तरा धिकारी पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव
आठवें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री
पद बहाल - 29 जनवरी 1972 – 22 दिसम्बर 1975
पूर्वा धिकारी श्यामा चरण शुक्ल
उत्तरा धिकारी श्यामा चरण शुक्ल
जन्म 19 अक्टूबर 1920
झालरापाटन , झालावाड़, राजस्थान
मृत्यु 1996
राष्ट्रीयता भारतीय
राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर स्वर्गीय प्रकाश चंद्र सेठी मुख्यमंत्री पुराने जमाने के सबसे कठिन दौर में कांग्रेस के संकटमोचक के रूप में प्रकाश चंद सेठी का नाम लिया जाता है। इंदिरा गांधी के राजनीतिक काल में सबसे महत्वपूर्ण किरदार निभाने वाले प्रकाश चंद सेठी अविभाजित मध्यप्रदेश के आठवें मुख्यमंत्री बने थे। वे दो बार मुख्यमंत्री बने उज्जैन से ताल्लुक रखने वाले विधायक प्रकाश चंद्र सेठी 29 जनवरी 1972 को प्रथम बार मुख्यमंत्री बने दूसरी बार 23 मार्च 1972 को मुख्यमंत्री बने जिनका कार्यकाल 23 दिसंबर 1975 तक रहा।
श्री प्रकाश चंद्र सेठी का मुख्यमंत्रीत्व काल निम्नलिखित है:- चतुर्थ विधान सभा में (1967-1972) दिनांक 29.01.1972 से 22.03.1972 तथा पंचम् विधान सभा मे 23.03.1972 से 23.12.1975 तक।
प्रकाश चंद्र सेठी के सबसे विश्वसनीय सलाहकार के रूप में पंडित गुलाम अली फरिश्ता को याद किया जाता है पंडित गुलाम अली फरिश्ता का स्वर्गवास 4 फरवरी 1977 को हुआ था। प्रकाश चंद्र सेठी की दोस्ती समय की सबसे चर्चित दोस्तों में से एक थी। गौरतलब है कि जनता से रिश्ता अखबार के प्रबंध संपादक पप्पू फरिश्ता के पिता स्वर्गीय पंडित गुलाम अली फरिश्ता स्वर्गीय पंडित प्रकाश चंद सेठी के मुख्यमंत्री काल में ही सबसे ज्यादा चर्चित और दोस्ती निभाने वाले नेताओं में से एक थे। उसी दरमियान पंडित प्रकाश चंद सेठी ने स्वर्गीय गुलाम अली फरिश्ता को पंडित की उपाधि से नवाजा था।
केंद्र सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान सेठी इंदौर निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे । उन्होंने भारत की केंद्र सरकार में भी कई पदों पर कार्य किया - गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, रेलवे और आवास और विकास। उन्हें 1976 में केंद्रीय पेट्रोलियम और रसायन मंत्री के पद पर रहते हुए मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र से डकैतों के आत्मसमर्पण के प्रयासों के लिए भी जाना जाता है ।
26 मार्च 1969 को सीएम पद की शपथ लेने वाले शुक्ला ने 28 जनवरी 1972 को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। श्यामा चरण शुक्ला के इस्तीफे के बाद प्रकाश चंद्र सेठी को कांग्रेस विधायकों ने अपना नेता चुना था। उज्जैन से विधायक रहे सेठी ने 29 जनवरी 1972 को सीएम पद की शपथ ली।
ऐसे सीएम बने थे प्रकाश चंद्र सेठी
श्यामाचरण शुक्ला ने 26 मार्च 1969 को जब मध्य प्रदेश सीएम की शपथ ली तो उनकी कई कांग्रेस नेताओं ने नहीं बनती थी। लेकिन उनके लिए सबसे ज्यादा मुश्किल तब पैदा हो गई, जब राष्ट्पति चुनाव हुए। राष्ट्रपति चुनाव में ज्ञानी जैल सिंह और नीलम संजीव रेड्डी खड़े थे। श्यामाचरण शुक्ला ने इंदिरा गांधी की मर्जी के खिलाफ जाकर नीलम संजीव रेड्डी को वोट दिया। इसके बाद इंदिरा गांधी के करीबियों ने उन्हें तंग करना शुरू कर दिया। मामला ज्यादा बढ़ा तो इंदिरा गांधी ने मध्य प्रदेश के सभी कांग्रेस विधायकों को दिल्ली तलब किया और उनके साथ बैठक की। इसके बाद शुक्ला ने 27 जनवरी 1972 को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और उनका इस्तीफा मंजूर भी हो गया। इसके बाद प्रकाश चंद्र सेठी को कांग्रेस विधायकों का नया नेता चुना गया था।
1939 में उज्जैन के माधव महाविद्यालय के स्नेह सम्मेलन के एवं माधव क्लब के सचिव रहे। सन् 1942 में स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिये महाविद्यालयीन शिक्षा का बहिष्कार किया। सन् 1942 में तथा सन् 1949 से 1952 तक मध्यभारत इंटक के उपाध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला। सन् 1951 से अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य सन् 1948-49 में इंटक से संबंधित टेक्सटाईल वर्कर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे। मध्यभारत कर्मचारी संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। सन् 1951 1954 तथा 1957 में उज्जैन जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। सन् 1953 से 1957 तक मध्य भारत प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य रहे। मध्यभारत कला परिषद् के सदस्य रहे। सन् 1954-1955 में मध्य भारत कांग्रेस के कोषाध्यक्ष। सन् 1956 से 1959 तक मध्य भारत ग्राम तथा खादी मंडल तथा प्रादेशिक परिवहन समिति के सदस्य रहे। सन् 1957 से 1959 तक उज्जैन जिला सहकारी बैंक के संचालक। सन् 1953 बिहार में सन् 1954 पेप्सू में तथा सन् 1959 केरल में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की ओर से चुनाव प्रचारक रहे। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के द्वारा सन् 1955-1956 में कर्नाटक महाराष्ट्र बम्बई और गुजरात के लिये क्षेत्रीय प्रतिनिधि नियुक्त हुए। दिसम्बर 1966 में बिहार में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के पर्यवेक्षक रहे।
केन्द्रीय मंत्री के रूप मे
फरवरी 1967 में लोक सभा के लिये निर्वाचित। 9 जून 1962 से मार्च 1967 तक केन्द्रीय उप मंत्री। 13 मार्च 1967 से राज्यमंत्री 26 अप्रैल 1968 से 23 फरवरी 1969 तक इस्पात खान और धातु मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभारी मंत्री रहे तथा 14 फरवरी 1969 को वित्त मंत्रालय में राजस्व तथा व्यय मंत्री रहे।
केंद्र सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान सेठी इंदौर निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे । उन्होंने भारत की केंद्र सरकार में भी कई पदों पर कार्य किया - गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, रेलवे और आवास और विकास। उन्हें 1976 में केंद्रीय पेट्रोलियम और रसायन मंत्री के पद पर रहते हुए मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र से डकैतों के आत्मसमर्पण के प्रयासों के लिए भी जाना जाता है ।
राज्यसभा का कार्यकाल
प्रथम बार 02/02/1961 से लेकर 02/04/1964 तक तथा दूसरी बार 03/04/1964 से लेकर 02/04/1970 तक तथा तीसरी बार 03/04/1976 से लेकर 02/04/1982 तक राज्यसभा सदस्य रहे।
प्रचलित किस्सा
प्रकाश चंद्र सेठी के बारे में एक किस्सा प्रचलित है कि एक बार उन्होंने सरकारी विमान दिल्ली से भोपाल भेजकर अपना पायजामा मंगवाया था। मामला कुछ ऐसा था कि सेठी मौजूदा कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद की शादी में शामिल होने दिल्ली आए थे। इस दौरान उन्हें रात गुजारने के लिए दिल्ली में ही रुकना पड़ा। ऐसे में उन्होंने सरकारी विमान दिल्ली से भोपाल भेजकर अपना पायजमा मंगवाया था। वहीं उनके बारे में दूसरा किस्सा है कि उनके डर से चंबल के डाकूओं ने सरेंडर कर दिया था, ये वही डाकू थे जिनसे मध्य प्रदेश के लोग कांपते थे। हुआ कुछ ऐसा था कि उन दिनों मध्य प्रदेश में डाकूओं की समस्या काफी बड़ी थी। उस वक्त जय प्रकाश नारायण और विनोबा भावे डकैतों को सेरेंडर के लिए समझा रहे थे। वहीं सेठी डकैतों से सख्ती से निपटना चाहते थे। डाकूओं के इलाकों में बम गिराने के लिए सेठी वायुसेना के अधिकारियों से मुलाकात करने भी चले गए थे। इसके बाद डाकू डर गए और चंबल के करीब 500 डाकूओं ने उनके आगे सेरेंडर कर दिया था।
दिनांक 21.2.1996 को आपका देहावसान हो गया।
