
भारत की बारहवीं राष्ट्रपति
पद बहाल - 25 जुलाई 2007 – 25 जुलाई 2012
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी
पूर्वा धिकारी ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
उत्तराधिकारी प्रणब मुखर्जी
राजस्थान की सत्रहवीं राज्यपाल
पद बहाल - 8 नवंबर 2004 – 23 जून 2007
पूर्वा धिकारी मदन लाल खुराना
उत्तराधिकारी अखलाक़ुर रहमान किदवाई
राज्यसभा की नवीं उपसभापति
कार्यकाल - 18 नवंबर 1986 – 5 नवंबर 1988
पूर्वा धिकारी म.म. जेकब
उत्तरा धिकारी नाजमा हेप्तुल्लाह
जन्म 19 दिसम्बर 1934 (आयु 88)
नदगाँव, बंबई प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत
(अब महाराष्ट्र, भारत में)
जन्म का नाम प्रतिभा पाटिल
राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
अन्य राजनीतिक
संबद्धताऐं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन
जीवन संगी देवीसिंह राणसिंह शेखावत (1965–वर्तमान)
शैक्षिक सम्बद्धता पूणे विश्ववद्यालय (B.A., M.A.)
बंबई विश्वविद्यालय (LL.B.)
प्रारंभिक जीवन
महाराष्ट्र के जलगांव जिले में जन्मी प्रतिभा के पिता का नाम श्री नारायणराव पाटिल था। साड़ी और बड़ी सी बिंदी लगाने वाली यह साधारण पहनावे वाली महिला राजनीति में आने से पहले सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रही थी। उन्होंने जलगाँव के मूलजी जेठा कालेज से स्नातकोत्तर (एम ए) और मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कालेज (मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध) से कानून की पढा़ई की। वे टेबल टेनिस की अच्छी खिलाड़ी थीं तथा उन्होंने कई अन्तर्विद्यालयी प्रतियोगिताओं में विजय प्राप्त की। 1962 में वे एम जे कॉलेज में कॉलेज क्वीन चुनी गयीं। उसी वर्ष उन्होंने एदलाबाद क्षेत्र से विधानसभा (एसेंबली) के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर विजय प्राप्त की। उनका विवाह शिक्षाविद देवीसिंह रणसिंह शेखावत के साथ 7 जुलाई 1965 को हुआ। उनकी एक पुत्री तथा एक पुत्र है। श्री शेखावत के पूर्वज राजस्थान के सीकर जिले के लोसल छोटी गांव से थे और बाद में जलगांव महाराष्ट्र जाकर बस गये थे।
प्रतिभा देवीसिंह पाटिल (जन्म 19 दिसंबर 1934) स्वतन्त्र भारत के 60 साल के इतिहास में पहली महिला राष्ट्रपति तथा क्रमानुसार 12वीं राष्ट्रपति रही हैं। राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा पाटिल ने अपने प्रतिद्वंदी भैरोंसिंह शेखावत को तीन लाख से ज़्यादा मतों से हराया था। प्रतिभा पाटिल को 6,38,116 मूल्य के मत मिले जबकि भैरोंसिंह शेखावत को 3,31,306 मत मिले। उन्होंने 25 जुलाई 2012 को संसद के सेण्ट्रल हॉल में आयोजित समारोह में नव निर्वाचित राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को अपना कार्यभार सौंपते हुए राष्ट्रपति भवन से विदा ली।
प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है
1 जून 2019 को भारत की पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को विदेशियों को दिए जाने वाले मेक्सिको के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘ऑर्डेन मेक्सिकाना डेल एग्वेला एज्टेका’ (ऑर्डर ऑफ एज्टेक ईगल) से सम्मानित किया गया.
यह पुरस्कार मेक्सिको के राजदूत मेल्बा प्रिआ ने पुणे के एमसीसीआईए भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में पाटिल को प्रदान किया.
प्रतिभा पाटिल यह पुरस्कार पाने वाली भारत की दूसरी राष्टपति बनी.
इससे पहले यह सम्मान राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन को दिया गया था.
हालांकि अलग-अलग श्रेणी की बात करे तो यह सम्मान नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, प्रसिद्ध कलाकार सतीश गुजराल, उद्योगपति रघुपत सिंघानिया को प्रदान किया गया है !
राजनीतिक जीवन
श्रीमती पाटिल ने 27 वर्ष की अवस्था में 1962 में राजनीतिक जीवन का प्रारंभ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्यमंत्री यशवंत राव चव्हाण की देखरेख में प्रारंभ किया। 1962 से 1985 तक वे पांच बार महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य रहीं। इस दौरान वर्ष 1967 से 1972 तक वह महाराष्ट्र सरकार में राज्यमंत्री और वर्ष 1972 से 1978 तक कैबिनेट मंत्री रहीं उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। उन्होंने 1967 से 1972 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य, निषेध, पर्यटन, आवास और संसदीय कार्य, महाराष्ट्र सरकार में उप मंत्री पद पर कार्य किया। वे 1972 से 1974 तक महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्याण विभाग, 1974 से 1975 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग, 1975-1976 तक पुनर्वास और सांस्कृतिक कार्य विभाग और 1977 से 1978 तक शिक्षा विभाग में कैबिनेट मंत्री के पद आसीन रहीं। लेकिन जब 1979 में कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र विधान सभा में विपक्ष में पहुँची तो प्रतिभा पाटिल लगभग एक वर्ष तक विपक्ष की नेता रहीं। 1982 से 1985 तक फिर वे महाराष्ट्र सरकार में शहरी विकास और आवास तथा 1983-1985 तक नागरिक आपूर्ति और समाज कल्याण के विभागों में कैबिनेट मंत्री रहीं। 1985 में वे राज्यसभा पहुँची और 1986 में राज्यसभा की उप सभापति बनी। 18 नवम्बर 1986 से 5 नवम्बर 1988 तक वे सभापति, राज्य सभा भी रहीं। वे 1986 से 1988 के बीच लाभ समिति की अध्यक्षा और सदस्य, व्यापार सलाहकार समिति, राज्य सभा भी रहीं। श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति महाराष्ट्र की अध्यक्षा (1988-1990), राष्ट्रीय शहरी सहकारी बैंक एवं ऋण संस्थाओं की निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ की शासी परिषद की सदस्य रही हैं। 1981-1990 में वे महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस की प्रमुख बनीं। उन्हें वर्ष 1991 में दसवीं लोक सभा (संसद के निचले सदन) के लिए निर्वाचित किया गया और उन्होंने 1991 में अध्यक्षा, सदन समिति, लोक सभा के रूप में भी कार्य किया। श्रीमती पाटिल को 8 नवम्बर 2004 को राजस्थान की राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति पद पर निर्वाचन के लिए 22 जून 2007 को राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया।
सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ
उन्होंने महिलाओं के कल्याण के लिए कार्य किया और मुम्बई, दिल्ली में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास, ग्रामीण युवाओं के लाभ हेतु जलगांव में इंजीनियरिंग कॉलेज के अलावा श्रम साधना न्यास की स्थापना की। श्रीमती पाटिल ने महिला विकास महामण्डल, जलगांव में दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय और विमुक्त जमातियों तथा बंजारा जनजातियों के निर्धन बच्चों के लिए एक स्कूल की स्थापना की। श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने अनेक यात्राएं की है और इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ सोशल वेलफेयर कॉन्फ्रेंस, नैरोबी और पोर्टे रीको में भाग लिया। उन्होंने 1985 में इस सम्मेलन में शिष्टमण्डल के सदस्य के रूप में बुल्गारिया में, महिलाओं की स्थिति पर ऑस्ट्रिया के सम्मेलन में शिष्टमण्डल की अध्यक्ष के रूप में, लंदन में 1988 के दौरान आयोजित राष्ट्रमण्डलीय अधिकारी सम्मेलन में, चीन के बीजिंग शहर में विश्व महिला सम्मेलन में भाग लिया।
श्रीमती पाटिल की विशेष रुचि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और महिलाओं के कल्याण में है। श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने जलगांव जिले में महिला होम गार्ड का आयोजन किया और 1962 में उनकी कमांडेंट थीं, वे राष्ट्रीय सहकारी शहरी बैंक और ऋण संस्थाओं की उपाध्यक्ष रहीं तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति, महाराष्ट्र की अध्यक्षा थीं। श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने अमरावती में दृष्टिहीनों के लिए एक औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय, निर्धन और जरूरतमंद महिलाओं के लिए सिलाई कक्षाओं, पिछड़े वर्गों और अन्य पिछड़े वर्गों के बच्चों के लिए नर्सरी स्कूल खोल कर उल्लेखनीय योगदान दिया तथा किसान विज्ञान केन्द्र, अमरावती में किसानों को फसल उगाने की नई एवं वैज्ञानिक तकनीकें सिखाने, संगीत और कम्प्यूटर की कक्षाएं आयोजित की।
प्रमुख विवाद
प्रतिभा पाटिल के साथ सबसे पहला विवाद तब जु़डा जब उन्होंने राजस्थान की एक सभा में कहा कि राजस्थान की महिलाओं को मुगलों से बचाने के लिए परदा प्रथा आरंभ हुई। इतिहासकारों ने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए दावेदार प्रतिभा का इतिहास ज्ञान शून्य है। जबकि मुस्लिम लीग जैसे दलों ने भी इस बयान का विरोध किया। समाजवादी पार्टी ने कहा कि प्रतिभा पाटिल मुसलिम विरोधी विचारधारा रखती हैं। प्रतिभा दूसरे विवाद में तब घिरी जब उन्होंने एक धार्मिक संगठन की सभा में अपने गुरू की आत्मा के साथ कथित संवाद की बात कही। प्रतिभा के पति देवी सिंह शेखावत पर स्कूली शिक्षक को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का आरोप है। उन पर हत्यारोपी अपने भाई को बचाने के लिए अपनी राजनीतिक पहुंच का पूरा पूरा इस्तेमाल करने का भी आरोप है। उन पर चीनी मिल कर्ज में घोटाले, इंजीनियरिंग कालेज फंड में घपले और उनके परिवार पर भूखंड हड़पने के संगीन आरोप हैं।
