
भारत के गृह मंत्री
कार्यकाल - 31 जुलाई 2012 - 26 मई 2014
प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह
पूर्व अधिकारी पी. चिदम्बरम
उत्तराधिकारी राजनाथ सिंह
भारत के ऊर्जा मंत्री
कार्यकाल - 2009 - 2012
प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह
पूर्व अधिकारी अनंत गीते
उत्तराधिकारी एम॰ वीरप्पा मोइली
आन्ध्र प्रदेश के राज्यपाल
कार्यकाल - 4 नवम्बर 2004 - 29 जनवरी 2006
पूर्व अधिकारी सुरजीत सिंह बरनाला
उत्तराधिकारी रामेश्वर ठाकुर
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री
कार्यकाल - 18 जनवरी 2003 -4 नवम्बर 2004
पूर्व अधिकारी विलासराव देशमुख
उत्तराधिकारी विलासराव देशमुख
जन्म 4 सितम्बर 1941 (आयु 81)
सोलापुर, बम्बई प्रांत, ब्रिटिश भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
राजनैतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
अन्य राजनैतिक
सहबद्धताएं संयुक्त मोर्चा (1996–2004)
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (2004–वर्तमान)
विद्या अर्जन दयानंद कॉलेज, सोलापुर
शिवाजी विश्वविद्यालय
मुम्बई विश्वविद्यालय
सोलापुर विश्वविद्यालय
सुशीलकुमार संभाजी शिंदे (जन्म 4 सितंबर 1941) महाराष्ट्र राज्य के एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वह 26 मई 2014 तक गृह मामलों के मंत्री, मनमोहन सिंह सरकार में ऊर्जा मंत्री और लोकसभा में सदन के नेता थे। उन्होंने पहले 18 जनवरी 2003 से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था अक्टूबर 2004 तक।
जन्म तथा शिक्षा
शिंदे का जन्म 4 सितम्बर 1941 को महाराष्ट्र के शोलापुर में हुआ था। उन्होंने दयानंद कॉलेज, शोलापुर से आर्ट्स में ऑनर्स डिग्री ली थी और बाद में शिवाजी यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री भी हासिल की। शिंदे ने अपना करियर शोलापुर सेशन कोर्ट में एक नाजिर के तौर पर शुरू किया था लेकिन बाद में वे राज्य पुलिस में सब इंस्पेक्टर बन गए। शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने वाले पहले दलित नेता हैं।
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार में केन्द्रीय बिजली मंत्री भी रह चुके है।
इस पदोन्नति के साथ सुशील कुमार शिंदे सरकार के सबसे महत्वपूर्ण और ताक़तवर मंत्रियों में से एक हो गए थे। यह भी संयोग है कि उनको सब-इंस्पेक्टर के पद से इस्तीफ़ा दिलवाकर 1971 में राजनीति में लाने वाले शरद पवार केंद्र में मंत्री तो हैं लेकिन उनका कृषि मंत्री का ओहदा उतना ताक़तवर नहीं थे।
शिंदे ने सोलापुर सत्र अदालत में एक बेलीफ के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, जहां उन्होंने 1957 से 1965 तक सेवा की। बाद में, वह एक राज्य पुलिस के रूप में एक कॉन्स्टेबल में शामिल हो गए, और सीआईडी के तहत छह साल के लिए महाराष्ट्र पुलिस सीआईडी के पुलिस निरीक्षक के तौर पर काम किया।
राजनीति
शिंदे कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 1978, 1980, 1985 और 1990 में जीता। शिंदे जुलाई 1992 से मार्च 1 99 8 के दौरान महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए चुने गए। 2002 में, शिंदे भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हार गए। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन उम्मीदवार भैरों सिंह शेखावत उन्होंने 2003 से 2004 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया, इससे पहले 30 अक्टूबर 2004 को आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के पद पर नियुक्त किए गए सुरजीत सिंह बरनाल, जो तमिलनाडु के गवर्नर बने थे, की जगह थी। उन्होंने 29 जनवरी 2006 को कार्यालय छोड़ा।
20 मार्च 2006 को शिंदे को राज्यसभा से दूसरे बार राज्यसभा के रूप में निर्वाचित किया गया। उनके पूर्ववर्ती प्रणव मुखर्जी को भारत के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद शिंदे लोकसभा में सत्ताधारी पार्टी के नेता बने। शिंदे 2006 से 2012 तक भारत के ऊर्जा मंत्री थे। बाद में, उन्हें 2012 में भारत के गृह मंत्री नियुक्त किया गया।
2014 लोकसभा चुनाव में, शिंदे कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार थे। भाजपा उम्मीदवार श्री शरद बनसोड ने उन्हें हराया था।
शिंदे का राजनीतिक सफर
शिंदे कांग्रेस के लो-प्रोफ़ाइल नेता माने जाते हैं। महाराष्ट्र के शोलापुर में वर्ष 1941 में एक दलित परिवार में जन्में शिंदे के पास आर्ट्स की ऑनर्स डिग्री और कानून की डिग्री है। इन्होंने वर्ष 1965 तक वे शोलापुर की अदालत में वकालत करते रहे फिर पुलिस में भर्ती हो गए। पाँच साल तक पुलिस की नौकरी करने के बाद राजनीति में आ गए।
ये पाँच बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य चुने गए और राज्यमंत्री से लेकर वित्तमंत्री और मुख्यमंत्री तक हर पद पर रहे। एक बार महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1992 में उन्हें पार्टी ने राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया। यहाँ उन्हें सोनिया गांधी के नज़दीक जाने का मौक़ा मिला और इसी की वजह से 1999 में उन्हें अमेठी में सोनिया गांधी का प्रचार संभालने का मौक़ा मिला।
1999 में ये लोकसभा के लिए चुने गए फिर सोनिया गांधी के निर्देश पर वर्ष 2002 में उन्होंने एनडीए के उम्मीदवार भैरोसिंह शेखावत के ख़िलाफ़ उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा और हार गए। जब केंद्र में 2004 में जब यूपीए की सरकार आई तो उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाकर भेजा गया लेकिन एक साल बीतते बीतते उन्होंने यह पद भी छोड़ दिया।
वर्ष 2006 में यह एक बार फिर राज्यसभा के सदस्य बने और फिर ऊर्जा मंत्री 2009 में चुनाव में दूसरी बार ऊर्जा मंत्री बनाए गए और 31 जुलाई, 2012 को गृहमंत्री बनाए गए।
गृहमंत्री के रूप में उनके सामने ढेर सारी चुनौतियाँ होंगी लेकिन ऊर्जा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को बिना किसी उपलब्धि के कार्यकाल के रुप में याद किया जाएगा, जो ऐसे समय में ख़त्म हुआ जब मंत्रालय अपने इतिहास की सबसे बड़ी चुनौती से जूझ रहा था।
शिंदे 20 मार्च 2006 को महाराष्ट्र से दूसरी बार राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए।शिंदे अपने पूर्ववर्ती प्रणब मुखर्जी के भारत के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद लोकसभा के नेता बने। शिंदे ने 2006 से 2012 तक भारत के ऊर्जा मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में उन्हें 2012 में भारत का गृह मंत्री नियुक्त किया गया। गृह मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में आतंकवादियों अफजल गुरु और अजमल कसाब को फांसी देने के दो बड़े फैसले हुए।
2012 के उत्तरी भारत पावर ग्रिड की विफलता के दौरान शिंदे ने यह देखते हुए आलोचना को खारिज कर दिया कि भारत प्रमुख बिजली आउटेज से पीड़ित अकेला नहीं था, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्राजील दोनों ने पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के ब्लैकआउट का अनुभव किया था। उत्तर प्रदेश के अधिकारियों जहां माना जाता है कि समस्या शुरू हो गई है ने कहा कि भीषण गर्मी में ग्रिड बिजली की भारी मांग को पूरा नहीं कर सकता। उत्तर प्रदेश बिजली निगम के प्रमुख अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि ग्रिड का टूटना राज्यों द्वारा गर्मियों की मांग को पूरा करने के लिए आवंटित बिजली से अधिक लेने के कारण था।
2014 के लोकसभा चुनाव में शिंदे कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार थे। उन्हें भाजपा उम्मीदवार श्री शरद बंसोडे ने हराया था।
सुशील कुमार शिंदे ने 2019 का लोकसभा चुनाव सोलापुर से लड़ा था। शिंदे कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार थे। उन्हें भाजपा उम्मीदवार श्री सिद्धेश्वर महाराज ने 156,261 वोटों के अंतर से हराया था। उनके अनुसार 2019 भारतीय आम चुनाव उनके द्वारा लड़ा गया आखिरी लोकसभा चुनाव था।
गृहमंत्री के रूप में
शिंदे का कहना है कि उन्होंने ये कल्पना कभी नहीं की थी कि वे एक दिन देश के गृहमंत्री बनेंगे। ये लोकतंत्र की वजह से संभव हुआ है। इसके लिए ये मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी को धन्यवाद देते हैं। इससे पहले वो ऊर्जा मंत्री हुआ करते थे और मंगलवार को जब उनको पदोन्नत कर गृहमंत्री बनाया गया तब देश का आधे से ज़्यादा हिस्सा अंधेरे में डूबा हुआ था। उत्तरी, पूर्वी और पूर्वोत्तर पॉवर ग्रिड के फेल हो जाने से सैकड़ों ट्रेनें यहाँ वहाँ अटकी हुई थीं और औद्योगिक उत्पादन ठप पड़ा हुआ था। मीडिया में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस निर्णय की जमकर आलोचना हुई है कि ऐसे दिन में जब उन्हें पॉवर ग्रिड फेल होने के लिए जवाबदेह माना जाना था, उन्हें पदोन्नत कर दिया गया। इस पदोन्नति के साथ सुशील कुमार शिंदे सरकार के सबसे महत्वपूर्ण और ताक़तवर मंत्रियों में से एक हैं। यह भी संयोग है कि उनको सब-इंस्पेक्टर के पद से इस्तीफ़ा दिलवाकर 1971 में राजनीति में लाने वाले शरद पवार केंद्र में मंत्री तो हैं लेकिन उनका कृषि मंत्री का ओहदा उतना ताक़तवर नहीं है।
दिल्ली गैंगरेप की घटना से लेकर अध्यादेश लाने के तमाम सवालों का जवाब देने के लिए सरकार ने शिंदे की जगह वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जिम्मेदारी दी थी। इसमें जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी के गठन का मामला हो या अध्यादेश को लागू करना, इन सभी पर चिदंबरम ही सरकार का पक्ष रख रहे थे।
हिंदू आतंकवाद को लेकर ताजा बयान से निशाने पर आए शिंदे को सरकार ने दुष्कर्म कानून को मजबूत करने के लिए लाए गए अध्यादेश पर भी बोलने का मौका देना मुनासिब नहीं समझा। इसके लिए जीओएम मीडिया की प्रेस कांफ्रेंस में शिंदे की जगह चिदंबरम ने मोर्चा संभाला था।
उच्चपदस्थ सूत्र इस अति संवेदनशील मुद्दे को संभालने में शिंदे की कमजोरी को इस हालात की वजह बता रहे हैं। लेकिन इस बारे में चिदंबरम ने कहा कि जीओएम मीडिया सरकार की तरफ से मीडिया को जानकारी देता है। लिहाजा इस मामले में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन बचाव की इस दलील के साथ चिदंबरम ने इस बात का जवाब नहीं दिया कि शिंदे जस्टिस वर्मा कमेटी से संपर्क में क्यों नहीं थे। जबकि यह पूरा मामला गृह मंत्रालय से जुड़ा है।
गौरतलब है कि जस्टिस वर्मा को इस कमेटी के लिए राजी करने की जिम्मेदारी भी शिंदे की जगह चिदंबरम की दी गई थी। कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट शिंदे को नहीं सौंपी थी बल्कि गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को विज्ञान भवन बुलाकर रिपोर्ट दी गई। बजट सत्र की तैयारी में पूरी तरह व्यस्त होने के बावजूद इस अध्यादेश की जानकारी देने शिंदे की जगह चिदंबरम खुद आए।
नाराजगी की वजह
पिछले दिनों शिंदे ने जयपुर में कांग्रेस की चिंतन बैठक में भाजपा और आरएसएस को आतंक का संचालक बता कर सरकार को बचाव की मुद्रा में ला दिया था। इस पर भाजपा ने शिंदे का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया था। इससे पहले पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक की भारत यात्रा के दौरान बाबरी ढांचे और भारत विरोधी बयानों का ठीक तरह से जवाब नहीं देने के आरोप भी शिंदे पर लगे। सूत्र बताते हैं कि गैंगरेप घटना के बाद प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने और गृह सचिव आरके सिंह के दिल्ली पुलिस कमिश्नर की खुलेआम तारीफ भी सरकार को पूरी तरह खटक रही थी।
बड़ा बयान 2022
मेरा दामाद गुजराती इसलिए मैंने वहां के लोगों को दिया आरक्षण- हल्की स्माइल के साथ बोले शिंदे पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे ने गुजराती समाज को आरक्षण को लेकर एक बड़ा बयान दे दिया है। शिंदे से इस कदम की वजह अपने दामाद को बताया है।
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे ने सोलापुर में एक कार्यक्रम के दौरान बिना किसी नेता का नाम लिए अपने ही पार्टी के नेताओं पर निशाना साधा है। इस दौरान आरक्षण पर शिंदे ने ऐसा बयान दे दिया, जो उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है। सुशील कुमार शिंदे ने यहां कहा कि जब मैं राज्य का मुख्यमंत्री था, उस वक्त मैंने गुजराती समाज को 2 परसेंट आरक्षण दिया था. आरक्षण इसलिए दिया क्योंकि मेरा दामाद गुजराती है।
टीवी9 मराठी की खबर के मुताबिक सुशील कुमार शिंदे सोलापुर गुजराती समाज एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। शिंदे सोलापुर में गुजराती समाज के लोगो को संबोधित करते हुए ये हंसते हुए, मजाकिया अंदाज में कहा कि जब मैं राज्य का मुख्यमंत्री था, उस वक्त मैंने गुजराती समाज को 2 परसेंट आरक्षण दिया था। ये एक अच्छा काम मैंने किया था, लेकिन लोग अब भूल गए हैं कि सुशील कुमार शिंदे ने कोई अच्छा काम किया था। आरक्षण इसलिए दिया क्योंकि मेरा दामाद गुजराती है।
पुरस्कार और सम्मान
5 जनवरी 1977: भारतीय जायसी द्वारा देश के दस उल्लेखनीय युवाओं में चयनित।
1978: साप्ताहिक 'मनोहर' के सर्वेक्षण में सबसे लोकप्रिय मंत्री के रूप में दूसरी पसंद।
1981: कांग्रेस पार्टी द्वारा "आदर्श युवा" के रूप में बसव भूषण पुरस्कार से सम्मानित।
9 मार्च 1996: मदर टेरेसा के हाथों संसद के सर्वश्रेष्ठ सदस्य के रूप में "राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार"।
2003: भाई बागल पुरस्कार 2003, इंडिया टुडे में तीसरा स्थान - पाठकों की पसंद सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री।
2005: वरिष्ठ पत्रकार अरुण टिकेकर के हाथों गुरुवर्य शंकरराव कानिटकर पुरस्कार।
22 सितंबर 2005 से 21 सितंबर 2007 और 21 नवंबर 2007 से 24 दिसंबर 2009: तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ के चांसलर।
23 जनवरी 2007: प्रथम डी लिट. डी वाई पाटिल विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित किया गया। (विषय – साहित्य)
9 सितंबर 2007: दूसरा डी लिट। श्रीकृष्ण देवराय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश द्वारा प्रदान की गई डिग्री। (विषय – साहित्य)
18 फरवरी 2009: तीसरा डी लिट। राजीव गांधी तकनीकी विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा प्रदान किया गया। (विषय – विज्ञान)
9 मई 2009: नवशक्ति टाइम्स द्वारा "नवशक्ति जीवन गौरव पुरस्कार" प्रदान किया गया।
19 जुलाई 2009: शिक्षा अधिकारी माननीय की स्मृति में "आदर्श शिक्षक" का सरकारी पुरस्कार। ईसा पूर्व ढेगले।
संभाले गए पद
1974 - 1992: सदस्य, महाराष्ट्र विधान सभा
1974 - 1975: खेल और सांस्कृतिक मामलों के राज्य मंत्री, महाराष्ट्र सरकार
1975 - 1977: वित्त, परिवार कल्याण, खेल और सांस्कृतिक मामलों के राज्य मंत्री, महाराष्ट्र सरकार
1978: महाराष्ट्र सरकार के श्रम और पर्यटन कैबिनेट मंत्री
1983 - 1985: वित्त, योजना, खेल और सांस्कृतिक मामलों के कैबिनेट मंत्री, महाराष्ट्र सरकार
1985: वित्त, योजना, पर्यावरण, महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री
1986: वित्त, योजना, उद्योग, कानून और न्यायपालिका, समाज कल्याण, महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री
1988 - 1990: वित्त, सांस्कृतिक मामलों, खेल और योजना, महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री
1990: शहरी विकास कैबिनेट मंत्री, महाराष्ट्र सरकार
1991: शहरी विकास, कानून और न्यायपालिका, महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री
1992: राज्यसभा के लिए चुने गए
1998 - 1999: सदस्य, बारहवीं लोक सभा
1999 - 2003: सदस्य, तेरहवीं लोक सभा
2003 - 2004: सदस्य, महाराष्ट्र विधान सभा
2004: मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र
2004 - 2006: आंध्र प्रदेश के राज्यपाल
2006: सदस्य, राज्य सभा और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री
2009: 15वीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित
31 मई - 31 जुलाई: केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, बिजली
अगस्त 2012: केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, गृह मंत्रालय
30 अगस्त 2012: सदन के नेता, लोक सभा
